जब बहू ने काम करने से मना किया, तो बेटे ने माँ के लिए रोबोट (Robot) खरीद लिया

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जब बहू ने काम करने से मना किया, तो बेटे ने माँ के लिए रोबोट खरीद लिया

 

शर्मा जी का परिवार छोटा था—वह, उनकी पत्नी सावित्री, बेटा रोहन और बहू नेहा।

सावित्री ने पूरी जिंदगी अपने परिवार के लिए काम किया था। सुबह सबसे पहले उठना, घर की सफाई करना, खाना बनाना और सबकी जरूरतों का ध्यान रखना उनकी आदत बन चुकी थी।

लेकिन उम्र अब उनका साथ नहीं दे रही थी।

एक दिन सुबह सावित्री रसोई में बर्तन धो रही थीं। हाथ कांप रहे थे।

नेहा वहां आई और बोली—

“मम्मी जी, अब मुझसे घर का इतना काम नहीं होगा। मेरी अपनी जिंदगी है, मैं हर वक्त घर के काम में नहीं लगी रह सकती।”

सावित्री चुप हो गईं।

उन्होंने सिर्फ इतना कहा—

“ठीक है बेटी, तुम अपना काम करो। मैं कर लूंगी।”

लेकिन उस दिन रोहन ने अपनी मां की आंखों में छिपा दर्द देख लिया था।

रात को उसने मां से पूछा—

“मां, आप इतना काम क्यों करती हैं?”

मां मुस्कुराकर बोलीं—

“बेटा, घर अपना है। काम करने में क्या बुराई है?”

रोहन ने मां का कांपता हुआ हाथ अपने हाथ में लिया।

“अब आपको काम करने की जरूरत नहीं है।”

अगले दिन रोहन बाजार गया।

शाम को जब वह घर लौटा तो उसके साथ एक बड़ा-सा डिब्बा था।

नेहा ने पूछा—

“क्या लेकर आए हो?”

रोहन ने डिब्बा खोला।

उसमें एक आधुनिक घरेलू रोबोट था, जो सफाई, सामान उठाने और कई घरेलू कामों में मदद कर सकता था।

नेहा हैरान होकर बोली—

“इतना महंगा रोबोट सिर्फ मां के लिए?”

रोहन ने शांत आवाज में कहा—

“हां। क्योंकि मेरी मां ने पूरी जिंदगी हमारे लिए काम किया है। अब उनकी उम्र आराम करने की है।”

सावित्री की आंखों में आंसू आ गए।

उन्होंने कहा—

“बेटा, मेरे लिए इतना पैसा खर्च करने की क्या जरूरत थी?”

रोहन मुस्कुराया।

“मां, आपने मेरे लिए अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर दी। उसके सामने ये रोबोट क्या चीज है?”

कमरे में खामोशी छा गई।

नेहा कुछ नहीं बोल पाई।

कुछ दिनों बाद रोबोट घर के काम में सावित्री की मदद करने लगा। अब वह सुबह आराम से चाय पीतीं और बालकनी में बैठकर अखबार पढ़तीं।

एक दिन नेहा उनके पास आई और बोली—

“मम्मी जी… मुझसे गलती हो गई। मुझे आपको अकेले काम करते देखकर आपकी तकलीफ समझनी चाहिए थी।”

सावित्री ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“बेटी, घर काम से नहीं… रिश्तों से चलता है।”

नेहा की आंखों में आंसू आ गए।

रोहन दूर खड़ा यह सब देख रहा था।

उसने सोचा—

“रोबोट ने घर का काम तो आसान कर दिया… लेकिन असली खुशी तब मिली, जब घर के रिश्ते फिर से जुड़ गए।”

कभी-कभी किसी मां को महंगे तोहफे की जरूरत नहीं होती। उसे बस यह एहसास चाहिए कि उसका बेटा आज भी उसके साथ खड़ा है।

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