बदनाम गली में कभी मत जाइयो

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गुस्से का माँ-बाप नहीं होताबदनाम गली में कभी मत जाइयो

बदनाम गली
Salman khan

 

बदनाम गली

शहर के पुराने हिस्से में एक गली थी, जिसे लोग बदनाम गली कहते थे।

दिन में भी वहाँ सन्नाटा रहता था और रात होते ही लोग उस रास्ते से गुजरना बंद कर देते थे। बुजुर्ग कहते थे—

“बेटा, चाहे कितनी भी जल्दी हो, उस गली में कभी मत जाइयो।”

लेकिन आखिर उस गली में ऐसा क्या था?

शहर में रहने वाला 22 साल का लड़का राघव इन बातों को अंधविश्वास मानता था। उसे लगता था कि लोग डर के कारण किसी जगह को बदनाम कर देते हैं।

एक रात राघव अपने दोस्त के घर से लौट रहा था। अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। जिस मुख्य रास्ते से उसे घर जाना था, वहाँ पानी भर गया।

तभी उसकी नजर सामने वाली छोटी-सी गली पर पड़ी।

वही गली…

बदनाम गली।

राघव ने कुछ पल सोचा।

फिर खुद से बोला, “लोग बेवजह डरते हैं। दस मिनट बचाने के लिए अगर मैं इस गली से चला जाऊँ तो क्या हो जाएगा?”

वह गली में घुस गया।

कुछ दूर जाने के बाद बारिश की आवाज भी धीमी लगने लगी।

गली के दोनों तरफ पुराने मकान थे। कई दरवाजों पर ताले लगे थे। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे।

अचानक पीछे से किसी के कदमों की आवाज आई।

ठक… ठक… ठक…

राघव रुक गया।

कदमों की आवाज भी रुक गई।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

कोई नहीं था।

वह तेजी से आगे बढ़ा।

कुछ दूर जाने के बाद उसे एक पुराना मकान दिखाई दिया। उसके दरवाजे पर एक लाल रंग का निशान बना था।

दरवाजा आधा खुला था।

अंदर से किसी बच्चे के रोने की आवाज आ रही थी।

राघव घबरा गया।

उसने सोचा, “शायद कोई बच्चा मुसीबत में है।”

वह दरवाजे के पास गया।

“कोई है?”

अंदर से आवाज आई—

“बचाओ…”

राघव ने दरवाजा खोल दिया।

अंदर अंधेरा था।

अचानक दरवाजा उसके पीछे से बंद हो गया।

धड़ाम!

राघव ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं खुला।

तभी अंधेरे में किसी ने कहा—

“तुम भी आ गए?”

राघव का शरीर कांपने लगा।

“क… कौन हो?”

कोई जवाब नहीं आया।

कुछ सेकंड बाद कमरे की एक पुरानी लालटेन अपने आप जल उठी।

राघव ने देखा कि सामने दीवार पर दर्जनों तस्वीरें लगी थीं।

हर तस्वीर में अलग-अलग लोग थे।

लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि हर तस्वीर के नीचे एक तारीख लिखी थी।

राघव ने पहली तस्वीर देखी।

1998

दूसरी—

2005

तीसरी—

2012

और फिर…

उसकी नजर आखिरी खाली फ्रेम पर पड़ी।

उसके नीचे आज की तारीख लिखी थी।

8 अगस्त 2026

राघव की सांस रुक गई।

तभी पीछे से आवाज आई—

“तुम्हारी तस्वीर अभी बाकी है।”

राघव चीखते हुए दरवाजे की तरफ भागा।

उसी समय उसकी नजर फर्श पर पड़े एक पुराने कागज पर पड़ी।

उस पर लिखा था—

“बदनाम गली में आने वाले लोग बुरे नहीं थे… लेकिन इस गली ने उन्हें बुरा बना दिया।”

राघव को अचानक समझ आया कि यह सिर्फ भूतों की कहानी नहीं थी।

यह गली वर्षों से अपराधियों का अड्डा रही थी। यहाँ लोगों को बहला-फुसलाकर लाया जाता था। कई लोग लालच में आए और फिर अपराध की दुनिया में फँस गए।

तभी पीछे से एक आदमी ने राघव को पकड़ लिया।

लेकिन राघव ने पूरी ताकत से उसे धक्का दिया और खिड़की तोड़कर बाहर कूद गया।

वह बारिश में दौड़ता रहा।

जब वह मुख्य सड़क पर पहुँचा तो पुलिस की गाड़ी वहाँ खड़ी थी।

पुलिस ने उसे देखकर पूछा—

“तुम उस गली से आए हो?”

राघव ने कांपते हुए सिर हिलाया।

पुलिस अधिकारी ने कहा—

“तुम बहुत भाग्यशाली हो। हम कई दिनों से उस मकान की तलाश कर रहे थे।”

अगले दिन पुलिस ने उस मकान पर छापा मारा।

वहाँ से कई अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और पुराने मामलों के सबूत मिले।

राघव को तब अपनी गलती समझ आई।

जिस बात को वह अंधविश्वास समझ रहा था, उसके पीछे लोगों के वर्षों के अनुभव छिपे थे।

उस दिन के बाद जब भी कोई उससे पूछता—

“क्या सच में बदनाम गली में नहीं जाना चाहिए?”

राघव सिर्फ इतना कहता—

“हर बदनाम जगह में भूत नहीं होता… लेकिन वहाँ जाने से पहले यह जरूर सोचो कि वह बदनाम क्यों हुई।”

और शहर के बुजुर्ग आज भी बच्चों को वही बात कहते हैं—

**“बदनाम गली में कभी मत जाइयो…

क्योंकि गलत रास्ता हमेशा डरावना नहीं होता,
कभी-कभी वह बहुत आसान भी लगता है।”**

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