बेईमान मालिक

सस्पेंस मिस्ट्री कहानी: “खिड़की के उस पार”
Dishonest lord
एक छोटे से शहर में मोहन नाम का एक युवक नौकरी करता था। उसके मालिक का नाम रमेश था। बाहर से रमेश बहुत सज्जन दिखाई देता था, लेकिन अंदर से वह बेईमान था।
मोहन सुबह से रात तक मेहनत करता, फिर भी हर महीने मालिक कोई न कोई बहाना बनाकर उसकी तनख्वाह काट देता। कभी कहता, “आज बिक्री कम हुई,” तो कभी कहता, “तुमसे गलती हुई है।”
एक दिन मोहन ने बिना शिकायत किए अपनी मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे ग्राहकों को भी मालिक की बेईमानी का पता चल गया। उन्होंने उसकी दुकान से खरीदारी करना कम कर दिया। कुछ कर्मचारी भी नौकरी छोड़कर चले गए।
कुछ महीनों बाद रमेश का कारोबार घाटे में चला गया। उसे समझ आया कि धोखे से कुछ समय तक फायदा मिल सकता है, लेकिन भरोसा टूट जाए तो व्यापार भी टूट जाता है।
दूसरी ओर, मोहन ने अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर एक छोटी-सी दुकान खोली। लोग उस पर भरोसा करते थे, इसलिए उसकी दुकान धीरे-धीरे सफल हो गई।
सीख:
ईमानदारी से कमाया हुआ सम्मान और पैसा लंबे समय तक साथ रहता है, जबकि बेईमानी का लाभ केवल थोड़े समय का होता है।