Prithviraj chohan the great king

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Prithviraj Raj chohan the great king

 

Prithviraj chohan पृथ्वीराज चौहान: भारत के वीरता और सम्मान का प्रतीक राजा

 

भारत का इतिहास जब भी वीरता, साहस और देशभक्ति की बातें करता है, तो सबसे पहले जिन नामों की गूंज सुनाई देती है, उनमें राजा पृथ्वीराज चौहान का नाम अग्रणी है।

वह न केवल एक महान योद्धा थे, बल्कि एक न्यायप्रिय शासक, कवि, प्रेमी और अपने धर्म तथा मातृभूमि के लिए जीवन न्योछावर करने वाले अमर नायक भी थे।

 

⚔️ राज्याभिषेक और वीरता की शुरुआत

 

पृथ्वीराज चौहान का जन्म 12वीं शताब्दी में अजमेर (राजस्थान) में हुआ था।

उनके पिता राजा सोमेश्वर चौहान और माता कपिल देवी थीं।

कम उम्र में ही पृथ्वीराज ने दिल्ली और अजमेर के सिंहासन की बागडोर संभाल ली थी।

बालक उम्र में भी उनकी बुद्धि, तीरंदाजी और रणकौशल देखकर बड़े-बड़े योद्धा चकित रह जाते थे।

 

उनके शासनकाल में चौहान वंश अपनी चरम सीमा पर पहुँचा।

दिल्ली और अजमेर की सीमाएं बढ़ाकर उन्होंने उत्तर भारत के बड़े हिस्से को अपने अधीन किया।

उनका नाम सुनते ही शत्रु काँप उठते थे।

 

💘 संयोगिता और पृथ्वीराज की अमर प्रेम कहानी

 

राजा जयचंद की पुत्री संयोगिता और पृथ्वीराज चौहान की प्रेम कहानी आज भी अमर है।

कहते हैं, जब जयचंद ने संयोगिता का स्वयंवर रखा और पृथ्वीराज का नाम आमंत्रण सूची से हटाया,

तो पृथ्वीराज ने स्वयंवर के दिन कन्नौज पहुँचकर संयोगिता का अपहरण कर लिया और उसे अपने साथ दिल्ली ले आए।

यह घटना न केवल प्रेम की मिसाल थी, बल्कि वीरता और साहस का भी प्रतीक बन गई।

 

⚔️ तराइन का युद्ध: भारतीय वीरता का इतिहास

 

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी के बीच तराइन के दो युद्ध भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं।

 

पहला युद्ध (1191 ई.):

पृथ्वीराज चौहान ने गोरी की सेना को पराजित किया। गोरी स्वयं घायल हुआ और बंदी बनाया गया।

पृथ्वीराज ने अपनी क्षमाशीलता दिखाते हुए उसे छोड़ दिया — लेकिन यही दया बाद में उसकी कमजोरी साबित हुई।

 

दूसरा युद्ध (1192 ई.):

गोरी ने विश्वासघात और चालबाज़ी से युद्ध जीता।

पृथ्वीराज बंदी बना लिए गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी — उनकी वीरता अंत तक बनी रही।

 

🏹 अंधे होकर भी शौर्य नहीं हारा

 

किंवदंती के अनुसार, जब मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज की आँखें निकाल दीं,

तो कवि चंदबरदाई ने उन्हें तीरंदाजी की दिशा बताई।

और फिर पृथ्वीराज ने “शब्दभेदी बाण” से गोरी को वहीँ मार गिराया।

यह घटना भारतीय वीरता और आत्मसम्मान का प्रतीक बन गई।

 

🕊️ पृथ्वीराज चौहान का योगदान

 

उन्होंने राजपूत एकता को बढ़ावा दिया।

 

उनकी नीतियाँ न्याय और प्रजा कल्याण पर आधारित थीं।

 

वे संस्कृति, कला और साहित्य के संरक्षक थे।

 

कवि चंदबरदाई के साथ उनकी मित्रता ने हिंदी साहित्य को “पृथ्वीराज रासो” जैसा महान ग्रंथ दिया।

 

🌅 पृथ्वीराज चौहान की विरासत

 

आज भी जब भारत की धरती पर वीरता की बात होती है,

तो पृथ्वीराज चौहान का नाम गर्व से लिया जाता है।

उनकी मूर्तियाँ, किले, और लोककथाएँ हमें याद दिलाती हैं कि

वह केवल एक राजा नहीं, बल्कि एक विचार हैं —

जिस विचार में राष्ट्रप्रेम, साहस और सम्मान सर्वोपरि है।

 

🕯️ निष्कर्ष

 

पृथ्वीराज चौहान ने यह सिखाया कि वीरता सिर्फ तलवार से नहीं, बल्कि आत्मसम्मान से जन्म लेती है।

उन्होंने भारत के इतिहास में वह अध्याय लिखा जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।

उनकी गाथा हमें प्रेरित करती है कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो,

सत्य, धर्म और सम्मान के लिए लड़ना कभी न छोड़ें।

 

✍️ लेखक: रंजन

स्रोत: trendsnewsandstoryshindi.in

श्रेणी: भारतीय इतिहास, महान राजा, प्रेरक कहानियाँ

 

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