Ajay devgan , Amir khan Starrer ISHQ movieसमय का खेल : जब किसी के जीवन में उजाला, तो किसी की राह में अँधेरा

समय का खेल : किसी का समय अच्छा, किसी का बुरा – विराट कोहली और स्मृति मंधाना से सीख
ज़िंदगी सिर्फ जीत और हार का नाम नहीं है, यह एक लंबी यात्रा है जिसमें हर मोड़ पर कुछ नया सीखने को मिलता है।
कभी हालात हमारे मुताबिक चलते हैं, तो कभी हालात हमें मोड़कर रख देते हैं। यही वजह है कि कहा जाता है – समय सबका एक जैसा नहीं होता।
विराट कोहली और स्मृति मंधाना से सीख
क्रिकेट की दुनिया इस बात की जीती-जागती मिसाल है। एक तरफ मैदान पर रिकॉर्ड बनते हैं, सेंचुरी पर सेंचुरी ठोकी जाती हैं, और तालियों की गूंज आसमान तक पहुंचती है।
दूसरी तरफ वही खिलाड़ी जब कैमरे से दूर होता है, तो वह भी एक आम इंसान की तरह अपने निजी संघर्षों से गुजर रहा होता है।
जैसे कि विराट कोहली — जिन्हें दुनिया आज भी “रन मशीन” के नाम से जानती है। उनके बल्ले से निकली हर शानदार पारी सिर्फ स्कोर नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और फोकस का नतीजा होती है।
उनकी सेंचुरी पर सेंचुरी सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की कहानी है।
वहीं दूसरी ओर, स्मृति मंधाना — भारतीय महिला क्रिकेट की मजबूत पहचान — भी एक इंसान हैं। उन्होंने भी मैदान पर देश को कई यादगार जीत दिलाई हैं। लेकिन खिलाड़ी के पीछे एक इंसान होता है, जिसके जीवन में भी उतार-चढ़ाव आते हैं।
हर खिलाड़ी की जिंदगी सिर्फ कैमरा और लाइट से नहीं बनती, उसके पीछे अकेलेपन, दबाव और संघर्ष की एक लंबी कहानी होती है।
बाहर की चमक और अंदर की सच्चाई
विराट कोहली और स्मृति मंधाना से सीख
हम अक्सर सोशल मीडिया पर सिर्फ चमक देखते हैं –
खिलाड़ियों की ट्रॉफी,
सेलिब्रेशन,
और मुस्कुराते चेहरे।
लेकिन सच्चाई यह है कि
हर चमक के पीछे कई नाकामी की रातें होती हैं,
कई आंसुओं को छुपाने की कहानियाँ होती हैं,
और कई ऐसी बातें होती हैं, जिन्हें दुनिया कभी नहीं देख पाती।
खिलाड़ी हो या आम इंसान,
दर्द सबका अपना-अपना होता है।
तुलना करना आसान, समझना मुश्किल
हम अक्सर कह देते हैं – “देखो, उसका समय अच्छा चल रहा है और इसका नहीं।”
लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि
हम सिर्फ बाहर से देख रहे होते हैं,
अंदर क्या चल रहा है, यह हमें पता नहीं होता।
किसी के घर की दीवारों के पीछे कितनी लड़ाइयाँ चल रही हैं,
यह सिर्फ वही जानता है जो वहाँ रहता है।
इसलिए जीवन में सबसे बड़ी समझदारी यही है कि
हम लोगों की जिंदगी का मजाक न बनाएं।
समय सिर्फ गिराता नहीं, सिखाता भी है
अगर विराट आज ऊँचाइयों पर हैं,
तो वह वहाँ अचानक नहीं पहुँचे हैं।
उन्होंने चोट, आलोचना और कठिन समय का सामना किया है।
और अगर मंधाना के जीवन में चुनौतियाँ आईं,
तो उससे उनका टैलेंट खत्म नहीं हो जाता,
बल्कि यह दिखाता है कि वे भी इंसान हैं।
समय किसी को सिर्फ तोड़ने नहीं आता,
वह इंसान को भीतर से मजबूत करने भी आता है।
हर इंसान का संघर्ष मैदान अलग होता है
क्रिकेट सिर्फ बल्ले और गेंद का खेल नहीं है,
यह धैर्य, मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास का खेल है।
ठीक वैसे ही जिंदगी भी है।
किसी की लड़ाई मैदान पर होती है,
तो किसी की लड़ाई अपने मन से।
लेकिन जीत उसी की होती है
जो हार मानने से इंकार करता है।
मानवता का सबसे बड़ा सबक
सबसे बड़ी जीत यह नहीं कि हम दूसरों से आगे निकल जाएं,
बल्कि यह है कि हम किसी के बुरे समय पर हँसें नहीं।
अगर हम किसी के दर्द को समझ सकें,
तो हम एक बेहतर इंसान बन सकते हैं।

चाहे मैदान पर रन बरसते विराट कोहली हों,
या जीवन में संघर्षों से गुजरती स्मृति मंधाना,
सच्चाई यही है कि
समय हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता।
लेकिन अंत में वही इंसान जीतता है,
जो हालात के आगे झुकता नहीं,
और इंसानियत को नहीं भूलता।
