कार्तिक पूर्णिमा 2025 Kartik Purnima

84 / 100 SEO Score

🍬 National Candy Day 2025: मिठास और बिज़नेस का संगम 🌕 कार्तिक पूर्णिमा विशेष: भक्ति, दान और प्रकाश का पवित्र पर्व

कार्तिक पूर्णिमा 2025
कार्तिक पूर्णिमा

 

कार्तिक पूर्णिमा

 

 कार्तिक पूर्णिमा, जिसे देव दीपावली, त्रिपुरारी पूर्णिमा या गंगा महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जो हर वर्ष दीपावली के लगभग 15 दिन बाद आता है। इस दिन का धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से बहुत महत्व है।

 

 🌼 कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

 

 हिंदू धर्म के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था। इसके अलावा, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध भी इसी दिन किया था, इसलिए इस दिन को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

 यह दिन पापों से मुक्ति, दान-पुण्य और तीर्थस्नान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

 

 🕉️देव दीपावली: जब देवता करते हैं दीपदान

 

 काशी (वाराणसी) में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली का भव्य उत्सव मनाया जाता है। सिद्धांत यह है कि इस दिन देवता स्वयं गंगा में स्नान कर दीपदान करते हैं।

 पूरा, खासकर घाट, दीपों से ऐसे जगमगा, जैसे आकाश के तारे धरती पर उतर आए हों। लाखों किशोर ये दिव्य दृश्य के साक्षी हैं।

 

 🪔इस दिन का शुभ स्नान और दान

 

 कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है।

 

 प्रातः काल गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से जन्म-जन्म के पाप धुल जाते हैं।

 

 दीपदान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

 

 दान-पुण्य करने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मिलता है।

 

 दान में देना क्या चाहिए:

 🌾 अनाज, 🧥 वस्त्र, 💰 धन, 🕯️ दीपक, 📚 धार्मिक ग्रंथ, और 🪙 गरीबों की सहायता सबसे श्रेष्ठ महापुरुष हैं।

 

 🛕 भगवान विष्णु और शिव की पूजा की विधि

 

 कार्तिक पूर्णिमा के दिन दोनों देवताओं की पूजा का विधान है –

कार्तिक पूर्णिमा 2025
कार्तिक पूर्णिमा

 सबसे पहले स्नान कर पीले वस्त्र।

 

 भगवान विष्णु को तुलसी दल, दीपक और पुष्प अभिषेक करें।

 

 फिर भगवान शिव का जलाभिषेक करें और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।

 

 शाम को दीपदान करें – घर, मंदिर, नदी तट पर दीप जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

 

 🌸 गुरु नानक जयंती: एकता और करुणा का संदेश

 

 कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था।

 इसलिए यह दिन गुरुपर्व के रूप में भी मनाया जाता है।

 गुरुद्वारों में कीर्तन, लंगर और सेवाभाव का मोह रहता है।

 गुरु नानक जी का संदेश –

 

 “एक ओंकार नाथम” – यानि ईश्वर एक ही है, और हर इंसान में एक ही अस्तित्व है।

 

 🌺 कार्तिक पूर्णिमा और ज्योतिषीय महत्व

 

 ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य, चंद्रमा और वृषभ राशि में स्थित होते हैं, जिससे इस दिन की ऊर्जा बहुत शक्तिशाली होती है।

 यह दिन मनोदैहिक, धन लाभ, और आध्यात्मिक प्रगति के लिए शुभ रहता है।

 

 ✨ कार्तिक स्नान का महत्व

 

 कार्तिक मास के पूरे महीने में जो लोग प्रतिदिन प्रातः स्नान और दीपदान करते हैं, उनके लिए यह पूर्णिमा स्नान सौगुण फल देता है।

 यदि किसी व्यक्ति को पूरे महीने स्नान नहीं मिलता है, तो केवल कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान करने से भी वही पुण्य प्राप्त हो सकता है।

 

 🌿भक्ति, करुणा और आत्मशुद्धि का दिन

 

 यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का भी दिन है।

 हम अपने भीतर के अंधकार – जैसे क्रोध, तृष्णा, लालच – को प्रभावित करके प्रेम, सेवा और करुणा के दीप जलाते हैं।

 यही कार्तिक पूर्णिमा का असली संदेश है।

 

 🪙 व्यवसाय और धन लाभ के लिए शुभ दिन

 

 वैदिक सिद्धांत के अनुसार, इस दिन नया कार्य, व्यवसाय की शुरुआत, या निवेश बहुत शुभ माना जाता है।

 इस दिन कई व्यापारी अपनी और धन की पूजा करते हैं।

 कहा जाता है –

 

 “जो कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान करता है, उसके घर लक्ष्मी कभी खाली नहीं रहती।”

 

 🎇भारतभर में कार्तिक पूर्णिमा के उत्सव

 

 भारत के अलग-अलग राज्यों में यह पर्व अलग-अलग तरह से मनाया जाता है –

 

 वाराणसी: देव दीपावली, गंगा आरती, दीपोत्सव

 

 हरिद्वार: गंगा स्नान और दीपदान

 

 पुएर (राजस्थान): पुएर मेला और ब्रह्मा जी की पूजा

 

 गुरुद्वारे: गुरु नानक जयंती के शिखर पर कीर्तन और लंगर

 

 दक्षिण भारत: भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की आराधना

 

 🌞 कार्तिक पूर्णिमा के दिन क्या करें और क्या न करें

 

 करें:

 ✅ स्नान एवं दीपदान करें

 ✅ब्राह्मणों, मुसलमानों को दान देना

 ✅ तुलसी पूजन करें

 ✅ मन, वचन और कर्म से पवित्र रहो

 

 न करें:

 ❌क्रोध, झूठ या कटु वचन का प्रयोग

 ❌ किसी जीव को कष्ट न दें

 ❌मांसाहार और मद्यपान से दूर रहें

 

 💫आध्यात्मिक संदेश

 

 कार्तिक पूर्णिमा हमें सिखाती है कि —

 

 “जब अंदर का दीपक जलता है, उसके बाहर की रोशनी का अर्थ होता है।”

 

 यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सच्ची पूजा मंदिर में नहीं, बल्कि इंसानियत में होती है।

 जब हम किसी के चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हैं, तो वही असली दीपावली होती है।

 

 🌕 समापन

 

 कार्तिक पूर्णिमा का पर्व आस्था, शांति और सद्भावना का प्रतीक है।

 यह दिन हमें भक्ति, दया और आत्मज्योति की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।

 जब हम इस दिन प्रेम का दीप जलाते हैं, तो दुनिया का हर तारा मिट जाता है।

 

 🙏शुभ कार्तिक पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

 “आपके जीवन में भी उजाला और शांति का दीपक सदाबहार रहे।”

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top